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नल लगा, पानी नहीं आया – जल जीवन मिशन की वो सच्चाई जो सरकार नहीं बताती

पानी को तरसे ग्रामीण: जल जीवन मिशन योजना पर उठे गंभीर सवाल – 2026 की कड़वी सच्चाई

गलियाँ टूट गईं। पाइप बिछ गए। बोर्ड लग गए – “हर घर जल।”

और फिर? कुछ नहीं। नल आया, पानी नहीं आया।

जम्मू के सांबा जिले के सीमावर्ती गाँव चचवाल चलियारी में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत गलियाँ खोदी गईं, पाइप डाले गए — और फिर काम रुक गया। एक साल से ज्यादा बीत गया। पानी आज भी वहाँ नहीं पहुँचा।

यह सिर्फ एक गाँव की कहानी नहीं है। यही हाल उत्तर प्रदेश में है, राजस्थान में है, और देश के दर्जनों जिलों में है — जहाँ इस योजना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन पीने का साफ पानी आज भी दूर का सपना है।

कागजों में 600 परियोजनाएं, जमीन पर कुछ नहीं

जल जीवन मिशन का बंद पड़ा नल — गाँव में पाइप लगे पर पानी नहीं आया
पाइप लगा, बोर्ड लगा – पानी आज भी नहीं आया। जम्मू-कश्मीर से UP तक यही तस्वीर

जम्मू-कश्मीर में जल जीवन मिशन के तहत 600 से अधिक परियोजनाएं कागजों पर पूरी दिखाई गई हैं, जबकि जाँच में पाया गया कि जमीन पर उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। इसके अलावा, 900 से अधिक परियोजनाओं का काम अभी अधूरा है और 400 से ज्यादा पर तो काम शुरू ही नहीं हुआ।

सोचिए – एक तरफ सरकारी रिपोर्ट में “काम पूरा” लिखा है। दूसरी तरफ, लोग आज भी कुएँ और नालों पर निर्भर हैं।

सेवानिवृत्त न्यायाधीश और विधायक हसनैन मसूदी की अध्यक्षता में बनी जाँच समिति इस मामले की पड़ताल कर रही है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है। रिपोर्ट आने के बाद कितने लोगों पर कार्रवाई होगी – यह देखना बाकी है।

राजस्थान में 960 करोड़ का खेल — ठेकेदार, अफसर, मंत्री सब एक साथ

राजस्थान वाले मामले की बात करें तो वहाँ तो पूरी व्यवस्था ही गड्ढे में गिरी हुई थी।

जाँच में सामने आया कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करके जल जीवन मिशन के तहत 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए गए। पूर्व मंत्री, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और ठेकेदार मिलकर इस पूरे भ्रष्टाचार में शामिल थे।

आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों के विरुद्ध बदलाव किए गए — जैसे ‘साइट विजिट सर्टिफिकेट’ की अनिवार्य शर्त जोड़ना — जिससे गोपनीय बोली प्रक्रिया भी उजागर हो गई।

गरीब गाँव वाला पानी माँग रहा था। ऊपर बैठे लोग पैसा बाँट रहे थे।

इस मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित कई आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और कुछ आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।

उत्तर प्रदेश: नल है, पानी नहीं

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर समेत कई जिलों में जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है। कई जगहों पर लोगों के कनेक्शन ही नहीं किए गए, और जहाँ किए भी गए वहाँ पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है।

गर्मी चरम पर है। और इस चिलचिलाती धूप में जब एक महिला सिर पर मटका रखकर पानी लेने जाती है — तो वो पूछती नहीं कि “जल जीवन मिशन में क्या हुआ।” वो बस चलती रहती है। क्योंकि उसे पता है – सवाल पूछने से पानी नहीं आता।

Reader Reality: अगर आपके गाँव में भी नल लगे हैं पर पानी नहीं आ रहा, तो यह आपकी लापरवाही नहीं है। यह एक व्यवस्थागत विफलता है जो देश के कोने-कोने में दोहराई जा रही है।

आँकड़े जो असहज करते हैं

देश की 12,000 से अधिक ग्रामीण बस्तियाँ आज भी लोहा, नाइट्रेट, लवणता और भारी धातुओं से प्रदूषित जल स्रोतों पर निर्भर हैं। यह आँकड़ा तब है जब “हर घर जल” के नाम पर लाखों करोड़ रुपये का बजट आवंटित हो चुका है।

संसदीय स्थायी समिति ने भी माना है — पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों और गलियों की मरम्मत कई राज्यों में ठीक से नहीं हुई। यानी पैसा गया, बुनियादी ढाँचा टूटा — और पानी फिर भी नहीं आया।

जल जीवन मिशन — कागज पर पूरा, जमीन पर अधूरा: योजना की असल हकीकत इन्फोग्राफिक
कागज में “काम पूरा”, जमीन पर “पानी नहीं” – यही है जल जीवन मिशन की दोहरी कहानी।

जल जीवन मिशन: वादे और जमीनी सच्चाई

पहलूवादाजमीनी सच्चाई
लक्ष्यहर घर नल कनेक्शनलाखों घर अभी भी बाहर
समयसीमा2024 तक पूराअभी तक अधूरा
जम्मू-कश्मीर3200 परियोजनाएं स्वीकृत600 केवल कागज पर, 400+ शुरू नहीं
राजस्थानपारदर्शी टेंडर प्रक्रिया960 करोड़ का घोटाला
जवाबदेहीअधिकारी जिम्मेदारकई अभी भी फरार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जल जीवन मिशन असल में क्या है और इसे क्यों शुरू किया गया था?

2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे शुरू किया था। सीधे शब्दों में कहें – लक्ष्य था कि 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर में नल से साफ पानी पहुँचे। महिलाओं को रोज़ मटका उठाकर मीलों न चलना पड़े। यह सोच अच्छी थी। लेकिन जमीन पर जो हुआ, वो अलग कहानी है।

क्या सच में इतने बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ?

राजस्थान में अकेले फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए 960 करोड़ के टेंडर दिए गए। जम्मू-कश्मीर में करीब 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप सामने आए हैं। यह संख्याएं सुनकर सिर घूम जाता है — खासकर जब आप जानते हों कि जो पैसा गया, वो उन्हीं गाँवों के लिए था।

अब आगे क्या होगा? कोई कार्रवाई होगी?

राजस्थान एसीबी ने संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया है। पूर्व मंत्री सहित कई आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। जाँच जारी है। लेकिन गाँव वालों को पानी कब मिलेगा — इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है।

क्या मेरे गाँव में भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं?

हाँ। जल शक्ति मंत्रालय का हेल्पलाइन नंबर है और राज्यस्तरीय जल समिति से भी संपर्क किया जा सकता है। जागरूकता ही पहला कदम है।

जल जीवन मिशन विफल - गाँव के बच्चे खाली पानी की टंकी के पास खड़े हैं
ये बच्चे नहीं जानते “जल जीवन मिशन” क्या है। वे बस जानते हैं – टंकी में पानी नहीं है।

सवाल अभी बाकी हैं

योजना गलत नहीं थी। इरादा नेक था।

लेकिन जब करोड़ों रुपये कागजों में खर्च होते हैं और गाँव की माँ आज भी सुबह चार बजे उठकर पानी भरने जाती है – तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, यह एक नैतिक सवाल है।

जल जीवन मिशन की समीक्षा होनी चाहिए। ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। और सबसे ज़रूरी — पानी पहुँचना चाहिए।

क्योंकि अगर पानी नहीं पहुँचा, तो मिशन चाहे जितना भी “जीवन” वाला नाम रखे – वो जीवन नहीं दे सकता।

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